श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 15 (पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga))

अध्याय 15 · श्लोक 13

पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 3 मिनट का पठन 114 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा । पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः ॥ १३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
गाम्
पृथ्वी में
आविश्य
प्रवेश करके
च
और
भूतानि
सम्पूर्ण प्राणियों को
धारयामि
धारण करता हूँ
अहम्
मैं
ओजसा
अपनी शक्ति से
पुष्णामि
पोषण करता हूँ
च
और
औषधीः
औषधियों (वनस्पतियों) को
सर्वाः
सब
सोमः
सोम (चन्द्र या रस) रूप
भूत्वा
होकर
रसात्मकः
रस स्वरूप।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

पृथ्वी में प्रवेश करके मैं अपनी शक्ति से सम्पूर्ण प्राणियों को धारण करता हूँ, तथा रसस्वरूप सोम (चन्द्रमा) बनकर सब औषधियों (वनस्पतियों) का पोषण करता हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान बताते हैं कि वे पृथ्वी में प्रवेश करके अपनी ऊर्जा से सबको धारण करते हैं और चन्द्रमा के रूप में वनस्पतियों को रस प्रदान करते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: पृथ्वी में प्रवेश करके मैं अपनी शक्ति (ओजसा) से समस्त प्राणियों को धारण करता हूँ। और रसात्मक सोम (चन्द्रमा) बनकर मैं सब वनस्पतियों का पोषण करता हूँ।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

परमात्मा ही सबका पोषक और धारक है। वह सृष्टि के प्रत्येक कण में व्याप्त है और अपनी शक्ति से सबका पालन करता है। यह उसकी व्यापकता और करुणा का प्रतीक है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga)
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श्लोक 13/20 65% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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