श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 15 (पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga))

अध्याय 15 · श्लोक 6

पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 3 मिनट का पठन 106 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः । यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥ ६॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

16 पद
न
नहीं
तत्
उस (परम धाम) को
भासयते
प्रकाशित करता
सूर्यः
सूर्य
न
नहीं
शशाङ्कः
चन्द्रमा
न
नहीं
पावकः
अग्नि
यत्
जहाँ
गत्वा
जाकर
न
नहीं
निवर्तन्ते
लौटते
तत्
वह
धाम
धाम
परमम्
परम
मम
मेरा।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

उस मेरे परम धाम को न सूर्य प्रकाशित करता है, न चन्द्रमा और न अग्नि। जहाँ जाने के बाद (जीव) लौटकर नहीं आते।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक परमात्मा के धाम (वैकुण्ठ, ब्रह्मलोक आदि) का वर्णन करता है। वहाँ न सूर्य, चन्द्र, अग्नि का प्रकाश आवश्यक है, क्योंकि वह स्वयंप्रकाश है। वहाँ जाने के बाद जीव जन्म-मरण के चक्र में नहीं लौटता।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं कि उनका परम धाम (नित्य धाम) ऐसा है जिसे न सूर्य, न चन्द्रमा, न अग्नि प्रकाशित कर सकते हैं। वह स्वयंप्रकाश है। उस धाम में जाने के बाद जीव फिर संसार में नहीं लौटता।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह परम धाम भौतिक जगत से परे है। वहाँ न तो सूर्य-चन्द्र की आवश्यकता है, न ही किसी बाहरी प्रकाश की। वहाँ पहुँचकर जीव मोक्ष को प्राप्त होता है, और जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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