श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 15 (पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga))

अध्याय 15 · श्लोक 8

पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 3 मिनट का पठन 107 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः । गृहीत्वैतानि संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात् ॥ ८॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
शरीरम्
शरीर
यत्
जब
अवाप्नोति
प्राप्त करता है
यत्
जब
च
भी
अपि
भी
उत्क्रामति
त्यागता है (शरीर से बाहर निकलता है)
ईश्वरः
जीव (शरीर का स्वामी)
गृहीत्वा
ग्रहण करके
एतानि
इन (मन और इंद्रियों) को
संयाति
चला जाता है
वायुः
वायु
गन्धान्
गंधों को
इव
जैसे
आशयात्
अपने स्थान से (सुगंध के स्रोत से)।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जैसे वायु अपने स्थान (पुष्प आदि) से गंधों को लेकर चलती है, उसी प्रकार शरीर का स्वामी (जीव) जब शरीर ग्रहण करता है और जब उसे त्यागता है, तब इन (मन और इंद्रियों) को लेकर जाता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक जीव के पुनर्जन्म के सिद्धांत को समझाता है। जैसे वायु गंध को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है, वैसे ही जीव अपने सूक्ष्म शरीर (मन, बुद्धि, इंद्रियाँ) के साथ एक शरीर से दूसरे शरीर में जाता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जीव (ईश्वर – यहाँ शरीर का स्वामी) जब नया शरीर धारण करता है और जब उसे त्यागता है, तब वह अपने साथ मन और इंद्रियों को ले जाता है। यह वैसे ही है जैसे वायु पुष्पों से गंध को उठाकर अन्यत्र ले जाती है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह श्लोक पुनर्जन्म की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है। जीव अपने कर्मों के अनुसार सूक्ष्म शरीर (मन, बुद्धि, इंद्रियाँ) सहित नए शरीर में प्रवेश करता है। स्थूल शरीर नष्ट हो जाता है, किंतु सूक्ष्म शरीर जीव के साथ रहता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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