मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः। यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते॥११॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
14 पदन
not
हि
indeed
देहभृता
by the embodied
शक्यम्
possible
त्यक्तुम्
to abandon
कर्माणि
actions
अशेषतः
completely
य
who
तु
but
कर्म-फल-त्यागी
renouncer of the fruits of actions
स
he
त्यागी
renouncer
इति
thus
अभिधीयते
is called.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
देहधारी के लिए सम्पूर्ण कर्मों का त्याग करना सम्भव नहीं है। परन्तु जो कर्मफल का त्यागी है, वही त्यागी कहा जाता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान् स्पष्ट करते हैं कि शारीरिक कर्मों का पूर्ण त्याग असम्भव है। इसलिए वास्तविक त्यागी वह है जो कर्म करते हुए फल की आसक्ति नहीं रखता। यही कर्मयोग का सार है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
देहधारी जीव के लिए सभी कर्मों का पूर्णतः त्याग करना सम्भव नहीं है। परन्तु जो कर्मफल का त्याग कर देता है, वही सच्चा त्यागी कहलाता है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
कर्मों से मुक्ति नहीं, कर्मफल से मुक्ति ही वास्तविक त्याग है। निष्काम भाव से कर्तव्यपालन ही सच्चा संन्यास है।