श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 12

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 3 मिनट का पठन 112 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अनिष्टमिष्टं मिश्रं च त्रिविधं कर्मणः फलम्। भवत्यत्यागिनां प्रेत्य न तु संन्यासिनां क्वचित्॥१२॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
अनिष्टम्
undesirable
इष्टम्
desirable
मिश्रम्
mixed
च
and
त्रि-विधम्
threefold
कर्मणः
of action
फलम्
fruit
भवति
accrues
अत्यागिनाम्
to the non-renouncers
प्रेत्य
after death
न
not
तु
but
संन्यासिनाम्
to the renouncers
क्वचित्
at any time.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

इष्ट, अनिष्ट और मिश्र – ऐसे तीन प्रकार के कर्मफल मरने के बाद त्यागरहित पुरुषों को मिलते हैं, परन्तु संन्यासियों को कभी नहीं मिलते।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

जो लोग फल की आसक्ति रखते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद कर्मों के अनुसार तीन प्रकार के फल भोगने पड़ते हैं। किन्तु जिन्होंने फल का त्याग कर दिया है, वे इन फलों से मुक्त हो जाते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कर्म के तीन प्रकार के फल होते हैं – अनिष्ट (अप्रिय), इष्ट (प्रिय) और मिश्र (मिलाजुला)। ये फल मरने के बाद अत्यागियों (फल की इच्छा रखने वालों) को मिलते हैं, किन्तु संन्यासियों (फलत्यागियों) को कभी नहीं मिलते।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

फल की आसक्ति रखने वाला व्यक्ति जन्म-मृत्यु के बन्धन में फँसा रहता है। फल का त्याग करने वाला कर्मबन्धन से मुक्त हो जाता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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श्लोक 12/78 15% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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