श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 14

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 3 मिनट का पठन 145 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम्। विविधाश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पञ्चमम्॥१४॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
अधिष्ठानम्
the seat (body)
तथा
also
कर्ता
the doer
करणम्
instruments
च
and
पृथक्-विधम्
various
विविधाः
various
च
and
पृथक्
separate
चेष्टाः
efforts
दैवम्
the divine (destiny)
च
and
एव
indeed
अत्र
here
पञ्चमम्
the fifth.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अधिष्ठान (शरीर), कर्ता, विविध प्रकार की इन्द्रियाँ, पृथक-पृथक चेष्टाएँ तथा पाँचवाँ दैव – ये (पाँच कारण) हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यहाँ पाँच कारण बताए गए हैं: १. शरीर (अधिष्ठान), २. कर्ता (जीव जो अहंकार से युक्त है), ३. करण (इन्द्रियाँ), ४. विविध चेष्टाएँ (प्राण आदि की क्रियाएँ), ५. दैव (अदृष्ट या पूर्वकर्म)।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

अधिष्ठान (शरीर), कर्ता (अहंकार से युक्त जीव), विविध प्रकार की इन्द्रियाँ, पृथक-पृथक चेष्टाएँ (प्राण आदि की क्रियाएँ) तथा पाँचवाँ दैव (अदृष्ट) – ये पाँच कारण हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

कर्म के ये पाँच कारण बताकर भगवान् यह स्पष्ट करते हैं कि आत्मा स्वयं कर्ता नहीं है। वह तो इन सबसे परे है। इस ज्ञान से साधक निर्लिप्त रहता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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श्लोक 14/78 18% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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