श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 19

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 3 मिनट का पठन 114 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः। प्रोच्यते गुणसंख्याने यथावच्छृणु तान्यपि॥१९॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
ज्ञानम्
knowledge
कर्म
action
च
and
कर्ता
doer
च
and
त्रिधा
threefold
एव
indeed
गुण-भेदतः
according to the differentiation of the gunas
प्रोच्यते
is spoken
गुण-संख्याने
in the science of the gunas
यथावत्
as they are
शृणु
hear
तानि
them
अपि
also.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

गुणों के भेद से ज्ञान, कर्म और कर्ता भी तीन प्रकार के कहे गए हैं। गुणसंख्यान (सांख्यशास्त्र) में यथार्थ रूप से उन्हें भी सुन।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

अब भगवान् गुणों के अनुसार ज्ञान, कर्म और कर्ता के तीन-तीन प्रकार बताने जा रहे हैं। यह वर्गीकरण साधक को अपने स्वभाव को पहचानने और उसे शुद्ध करने में सहायता करता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

गुणों के भेद से ज्ञान, कर्म और कर्ता भी तीन प्रकार के कहे गए हैं। गुणसंख्यान (सांख्यशास्त्र) में उन्हें यथार्थ रूप से सुनो।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

प्रत्येक वस्तु गुणों के अधीन है। इसलिए ज्ञान, कर्म और कर्ता भी गुणों से प्रभावित होते हैं। इनके भेद को समझकर साधक सात्त्विकता की ओर अग्रसर होता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 19 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 19/78 24% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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