श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 20

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 3 मिनट का पठन 111 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते। अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम्॥२०॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
सर्व-भूतेषु
in all beings
येन
by which
एकम्
one
भावम्
nature
अव्ययम्
imperishable
ईक्षते
sees
अविभक्तम्
undivided
विभक्तेषु
in the divided
तत्
that
ज्ञानम्
knowledge
विद्धि
know
सात्त्विकम्
sattvic.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जिस ज्ञान से सम्पूर्ण भूतों में एक अविनाशी भाव (ब्रह्म) अलग-अलग शरीरों में भी अविभक्त रूप से देखा जाता है, उस ज्ञान को सात्त्विक जानो।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

सात्त्विक ज्ञान वह है जो समस्त प्राणियों में एक ही अविनाशी तत्व को देखता है। वह भेदों में भी अभेद दर्शन करता है। यह आत्मज्ञान या ब्रह्मज्ञान है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जिस ज्ञान द्वारा मनुष्य सभी प्राणियों में एक अविनाशी तत्व को, जो विभक्त (पृथक) प्रतीत होने वाले शरीरों में भी अविभक्त रूप से स्थित है, देखता है – उस ज्ञान को तुम सात्त्विक जानो।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

सात्त्विक ज्ञान अद्वैत दर्शन है। यह समझता है कि सबमें एक ही चेतन तत्व विराजमान है। यही ज्ञान मोक्ष का कारण है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 20 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 20/78 26% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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