श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 2

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 3 मिनट का पठन 122 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
श्रीभगवानुवाच काम्यानां कर्मणां न्यासं संन्यासं कवयो विदुः। सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं विचक्षणाः॥२॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
श्रीभगवान्
the Supreme Lord
उवाच
said
काम्यानाम्
of those done with desire
कर्मणाम्
of actions
न्यासम्
renunciation
संन्यासम्
sannyasa
कवयः
the learned
विदुः
know
सर्व-कर्म-फल-त्यागम्
abandonment of all fruits of actions
प्राहुः
call
त्यागम्
tyaga
विचक्षणाः
the wise.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

श्रीभगवान् बोले: काम्य कर्मों के त्याग को विद्वान् लोग संन्यास कहते हैं और सब कर्मों के फलों के त्याग को बुद्धिमान् लोग त्याग कहते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान् स्पष्ट करते हैं कि संन्यास का अर्थ है सकाम कर्मों का त्याग, जबकि त्याग का अर्थ है सभी कर्मों के फलों का परित्याग। यह अंतर जीवन में कर्मयोग की साधना के लिए मौलिक है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान् कहते हैं: विद्वानों ने कामनापूर्ण कर्मों के त्याग को संन्यास कहा है, और सभी कर्मों के फलों के त्याग को त्याग कहा गया है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

कर्मों का त्याग मात्र पर्याप्त नहीं, बल्कि फल की आसक्ति का त्याग ही वास्तविक त्याग है। इसी से कर्मयोग सिद्ध होता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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श्लोक 2/78 3% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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