श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 22

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 3 मिनट का पठन 117 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यत्तु कृत्स्नवदेकस्मिन्कार्ये सक्तमहैतुकम्। अतत्त्वार्थवदल्पं च तत्तामसमुदाहृतम्॥२२॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
यत्
which
तु
but
कृत्स्नवत्
as if it were the whole
एकस्मिन्
in one
कार्ये
effect
सक्तम्
attached
अहैतुकम्
without reason
अतत्त्व-अर्थवत्
without knowledge of reality
अल्पम्
petty
च
and
तत्
that
तामसम्
tamasic
उदाहृतम्
is declared.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

किन्तु जो ज्ञान एक कार्य (शरीर आदि) में सम्पूर्ण की तरह आसक्त, बिना युक्ति के, वास्तविकता से रहित और तुच्छ है, वह तामस कहा गया है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

तामस ज्ञान अत्यन्त सीमित, तुच्छ और अयुक्तिपूर्ण होता है। यह किसी एक वस्तु या शरीर को ही सब कुछ मान लेता है और सत्य से परे नहीं जाता। यह अज्ञान का ही रूप है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जो ज्ञान किसी एक कार्य (विशेष वस्तु या शरीर) में ही सब कुछ मानकर आसक्त है, तर्क-युक्ति से रहित है, तत्त्व के ज्ञान से शून्य है और तुच्छ है – वह तामस ज्ञान कहलाता है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

तामस ज्ञान संकुचित और मूढ़ता पर आधारित होता है। यह व्यक्ति को अज्ञान के गर्त में डुबो देता है। साधक को इससे बचना चाहिए।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 22 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 22/78 28% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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