मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः। विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यते॥२८॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदअयुक्तः
unsteady
प्राकृतः
vulgar
स्तब्धः
stubborn
शठः
deceitful
नैष्कृतिकः
given to insulting
अलसः
lazy
विषादी
despondent
दीर्घ-सूत्री
procrastinating
च
and
कर्ता
doer
तामसः
tamasic
उच्यते
is called.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जो कर्ता अयुक्त (असंयमी), प्राकृत (असभ्य), स्तब्ध (घमण्डी), शठ (ठग), नैष्कृतिक (दूसरों का अपमान करने वाला), आलसी, विषादी (उदास रहने वाला) और दीर्घसूत्री (टालमटोल करने वाला) है – वह तामस कर्ता कहलाता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
तामस कर्ता के अनेक दोष बताए गए हैं: असंयम, असभ्यता, अहंकार, छल, अपमानप्रियता, आलस्य, निराशा, और कार्य में विलम्ब। ऐसा व्यक्ति न तो अपना कर्तव्य ठीक से निभाता है और न ही उन्नति कर पाता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
जो कर्ता अयुक्त (असंयमी), प्राकृत (असभ्य), स्तब्ध (घमण्डी), शठ (धूर्त), नैष्कृतिक (दूसरों को सताने वाला), आलसी, विषादी (उदास) और दीर्घसूत्री (टालमटोल करने वाला) है – वह तामस कर्ता कहलाता है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
तामस कर्ता के ये दोष उसे अधोगति की ओर ले जाते हैं। साधक को इनसे बचते हुए सात्त्विक गुणों को धारण करना चाहिए।