मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च कार्याकार्ये भयाभये। बन्धं मोक्षं च या वेत्ति बुद्धिः सा पार्थ सात्त्विकी॥३०॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदप्रवृत्तिम्
what is to be done
च
and
निवृत्तिम्
what is not to be done
च
and
कार्य-अकार्ये
proper and improper action
भय-अभये
fear and fearlessness
बन्धम्
bondage
मोक्षम्
liberation
च
and
या
which
वेत्ति
knows
बुद्धिः
intellect
सा
that
पार्थ
O Partha
सात्त्विकी
sattvic.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे पार्थ! जो बुद्धि प्रवृत्ति (कर्म करने) और निवृत्ति (कर्म त्यागने) को, कार्य-अकार्य को, भय-अभय को, तथा बन्धन और मोक्ष को यथार्थ रूप से जानती है – वह बुद्धि सात्त्विकी है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
सात्त्विक बुद्धि में विवेक होता है। वह स्पष्ट रूप से जानती है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं, किससे डरना चाहिए और किससे नहीं, क्या बाँधता है और क्या मुक्त करता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे पार्थ! जो बुद्धि प्रवृत्ति और निवृत्ति, कर्तव्य और अकर्तव्य, भय और अभय, तथा बन्धन और मोक्ष को यथार्थ रूप से जानती है – वह बुद्धि सात्त्विकी है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
सात्त्विक बुद्धि विवेकपूर्ण होती है। वह सत्य और असत्य के बीच अन्तर कर सकती है, जिससे साधक मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होता है।