श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 39

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 2 मिनट का पठन 117 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यदग्रे चानुबन्धे च सुखं मोहनमात्मनः। निद्रालस्यप्रमादोत्थं तत्तामसमुदाहृतम्॥३९॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
यत्
which
अग्रे
in the beginning
च
and
अनुबन्धे
in the sequel
च
and
सुखम्
happiness
मोहनम्
deluding
आत्मनः
of the self
निद्रा-आलस्य-प्रमाद-उत्थम्
arising from sleep, laziness, and heedlessness
तत्
that
तामसम्
tamasic
उदाहृतम्
is declared.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जो सुख आरम्भ में और अन्त में आत्मा को मोहित करने वाला है, तथा निद्रा, आलस्य और प्रमाद से उत्पन्न होता है – वह तामस सुख कहा गया है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

तामस सुख आलस्य, निद्रा, प्रमाद से उत्पन्न होता है। यह आरम्भ और अन्त दोनों में मोहकारक है, अर्थात् यह वास्तव में सुख नहीं बल्कि अज्ञान का रूप है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जो सुख आरम्भ और अन्त दोनों में आत्मा को मोहित करने वाला है, तथा निद्रा, आलस्य और प्रमाद से उत्पन्न होता है – वह सुख तामस कहलाता है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

तामस सुख वास्तव में सुख नहीं, बल्कि अज्ञान और जड़ता की स्थिति है। यह व्यक्ति को और अधिक नीचे गिराता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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