श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 4

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 2 मिनट का पठन 113 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
निश्चयं शृणु मे तत्र त्यागे भरतसत्तम। त्यागो हि पुरुषव्याघ्र त्रिविधः सम्प्रकीर्तितः॥४॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
निश्चयम्
the certain truth
शृणु
hear
मे
My
तत्र
in that
त्यागे
concerning renunciation
भरत-सत्तम
O best of the Bharatas
त्यागः
renunciation
हि
indeed
पुरुष-व्याघ्र
O tiger among men
त्रि-विधः
of three kinds
सम्प्रकीर्तितः
is declared.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे भरतश्रेष्ठ! उस त्याग के विषय में मेरे निश्चय को सुनो। हे पुरुषव्याघ्र! त्याग तीन प्रकार का कहा गया है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान् अब त्याग के तीन प्रकार बताने जा रहे हैं, जो सात्त्विक, राजस और तामस में विभाजित है। यह वर्गीकरण साधक को उचित मार्ग चुनने में सहायक होगा।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान् कहते हैं: हे भरतश्रेष्ठ, त्याग के विषय में मेरा निश्चयपूर्ण मत सुनो। हे पुरुषश्रेष्ठ, त्याग तीन प्रकार का कहा गया है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

किसी भी विषय को समझने के लिए उसके त्रिगुणात्मक वर्गीकरण को जानना आवश्यक है। त्याग भी तीन प्रकार का होता है, जो व्यक्ति के गुणों पर निर्भर करता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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श्लोक 4/78 5% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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