मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च। ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्॥४२॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदशमः
tranquility
दमः
self-control
तपः
austerity
शौचम्
purity
क्षान्तिः
forgiveness
आर्जवम्
simplicity
एव
indeed
च
and
ज्ञानम्
wisdom
विज्ञानम्
knowledge (of scriptures)
आस्तिक्यम्
faith
ब्रह्म-कर्म
the duty of a Brahmin
स्वभाव-जम्
born of his own nature.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
शम (मन का निग्रह), दम (इन्द्रियों का निग्रह), तप, शौच, क्षान्ति, आर्जव, ज्ञान, विज्ञान और आस्तिक्य – ये ब्राह्मण के स्वभावज कर्म हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
ब्राह्मण के स्वाभाविक गुण और कर्तव्य: मन और इन्द्रियों पर नियंत्रण, तपस्या, पवित्रता, क्षमा, सरलता, शास्त्रीय ज्ञान, आध्यात्मिक अनुभव, और ईश्वर में श्रद्धा।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
शम (मनोनिग्रह), दम (इन्द्रियनिग्रह), तप, शौच (पवित्रता), क्षान्ति (क्षमा), आर्जव (सरलता), ज्ञान, विज्ञान (तत्त्वज्ञान) और आस्तिक्य (श्रद्धा) – ये ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म हैं।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
ये गुण ब्राह्मण के लिए आवश्यक हैं, पर ये सभी के लिए अनुकरणीय हैं। इनके अभ्यास से व्यक्ति सात्त्विक बनता है।