श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 43

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 3 मिनट का पठन 113 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम्। दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम्॥४३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
शौर्यम्
valor
तेजः
splendor
धृतिः
firmness
दाक्ष्यम्
resourcefulness
युद्धे
in battle
च
and
अपि
also
अपलायनम्
not fleeing
दानम्
charity
ईश्वर-भावः
lordliness
च
and
क्षात्रम्
of a Kshatriya
कर्म
duty
स्वभाव-जम्
born of his own nature.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

शौर्य (वीरता), तेज (प्रभाव), धृति (दृढ़ता), दाक्ष्य (कुशलता), युद्ध में न भागना, दान और ऐश्वर्यभाव – ये क्षत्रिय के स्वाभाविक कर्म हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

क्षत्रिय के स्वाभाविक गुण: वीरता, तेज, धैर्य, चतुराई, युद्ध से न भागना, दानशीलता, और नेतृत्व क्षमता। ये गुण उसे शासन और रक्षा के योग्य बनाते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

शौर्य (वीरता), तेज (प्रताप), धृति (धैर्य), दाक्ष्य (कुशलता), युद्ध में न भागना, दान और ईश्वरभाव (नेतृत्व) – ये क्षत्रिय के स्वाभाविक कर्म हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

क्षत्रिय के ये गुण समाज के संरक्षण और धर्म की रक्षा के लिए आवश्यक हैं। इनका पालन करके वह अपने कर्तव्य का निर्वाह करता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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