श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 46

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 3 मिनट का पठन 120 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः॥४६॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
यतः
from whom
प्रवृत्तिः
the emanation
भूतानाम्
of all beings
येन
by whom
सर्वम्
all
इदम्
this
ततम्
is pervaded
स्व-कर्मणा
by one's own duty
तम्
Him
अभ्यर्च्य
worshiping
सिद्धिम्
perfection
विन्दति
attains
मानवः
a man.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जिससे सब प्राणियों की उत्पत्ति हुई और जिससे यह सम्पूर्ण जगत् व्याप्त है, उस परमेश्वर की अपने कर्म द्वारा आराधना करके मनुष्य सिद्धि को प्राप्त होता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

स्वकर्म के पालन का रहस्य यह है कि उसे ईश्वर की आराधना के रूप में करना चाहिए। समस्त कर्मों का स्वामी और व्यापक ईश्वर ही है। उसकी उपासना ही सच्ची सिद्धि है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जिस परमात्मा से सब प्राणी उत्पन्न हुए हैं और जिससे यह सम्पूर्ण जगत् व्याप्त है, उसकी अपने कर्म द्वारा आराधना करके मनुष्य सिद्धि को प्राप्त होता है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

हर कर्म को ईश्वर को समर्पित कर देना ही सच्ची पूजा है। इस भाव से किया गया कर्म बन्धन नहीं करता, बल्कि मुक्ति का साधन बन जाता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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श्लोक 46/78 59% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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