श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 51

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 2 मिनट का पठन 105 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
बुद्ध्या विशुद्धया युक्तो धृत्यात्मानं नियम्य च। शब्दादीन्विषयांस्त्यक्त्वा रागद्वेषौ व्युदस्य च॥५१॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
बुद्ध्या
with intellect
विशुद्धया
pure
युक्तः
endowed
धृत्या
with firmness
आत्मानम्
the self
नियम्य
controlling
च
and
शब्द-आदीन्
sound etc.
विषयान्
sense objects
त्यक्त्वा
having abandoned
राग-द्वेषौ
attraction and aversion
व्युदस्य
having cast off
च
and.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

विशुद्ध बुद्धि से युक्त होकर, धृति (दृढ़ता) द्वारा आत्मा को वश में करके, शब्दादि विषयों का त्याग करके तथा राग-द्वेष को दूर करके...

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक उस साधना के चरणों को बताता है जिससे साधक ब्रह्मप्राप्ति के योग्य बनता है: शुद्ध बुद्धि, आत्मसंयम, विषयासक्ति का त्याग, राग-द्वेष का परित्याग।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

विशुद्ध बुद्धि से युक्त होकर, धृति के द्वारा आत्मा को वश में करके, शब्दादि विषयों का त्याग करके, तथा राग-द्वेष को दूर करके...

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह साधना का आधार है: बुद्धि की शुद्धि, आत्मसंयम, इन्द्रियों को विषयों से हटाना, और द्वन्द्वों से मुक्ति।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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