श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 52

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 2 मिनट का पठन 105 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
विविक्तसेवी लघ्वाशी यतवाक्कायमानसः। ध्यानयोगपरो नित्यं वैराग्यं समुपाश्रितः॥५२॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

7 पद
विविक्त-सेवी
dwelling in solitude
लघु-आशी
eating lightly
यत-वाक्-काय-मानसः
controlling speech, body, and mind
ध्यान-योग-परः
engaged in meditation
नित्यम्
constantly
वैराग्यम्
detachment
समुपाश्रितः
having resorted to.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

एकान्तसेवी, अल्पाहारी, वाणी, शरीर और मन को वश में रखने वाला, नित्य ध्यानयोग में तत्पर, और वैराग्य का आश्रय लेकर...

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

साधना के और चरण: एकान्तवास, मिताहार, वाणी-शरीर-मन पर नियंत्रण, निरन्तर ध्यान, और वैराग्य का आश्रय।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

एकान्त में रहने वाला, अल्पाहारी, वाणी, शरीर और मन को वश में रखने वाला, नित्य ध्यानयोग में लीन, और वैराग्य का आश्रय लेकर...

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

ये बाह्य और आन्तरिक साधनाएँ हैं जो साधक को आत्मसाक्षात्कार के लिए तैयार करती हैं।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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श्लोक 52/78 67% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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