श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 55

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 3 मिनट का पठन 108 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः। ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम्॥५५॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
भक्त्या
by devotion
माम्
Me
अभिजानाति
knows
यावान्
as I am
यः
who
च
and
अस्मि
I am
तत्त्वतः
in truth
ततः
then
माम्
Me
तत्त्वतः
in truth
ज्ञात्वा
knowing
विशते
enters
तत्-अनन्तरम्
thereafter.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

भक्ति के द्वारा वह मुझे तत्त्व से जान लेता है कि मैं कितना हूँ और कौन हूँ। तत्पश्चात् मुझे तत्त्व से जानकर वह तुरन्त मुझमें ही प्रवेश कर जाता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

परा भक्ति से साधक भगवान् के स्वरूप को यथार्थ रूप से जान लेता है। फिर उस ज्ञान के बाद वह भगवान् में प्रवेश (तादात्म्य) प्राप्त कर लेता है। यह मोक्ष की सर्वोच्च अवस्था है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भक्ति के द्वारा वह मुझे यथार्थ रूप से जान लेता है कि मैं कितना हूँ और कौन हूँ। फिर मुझे तत्त्व से जानकर वह तुरन्त मुझमें प्रवेश कर जाता है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भक्ति ही परम ज्ञान का साधन है और उस ज्ञान से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। भक्ति, ज्ञान और मोक्ष का यह क्रम गीता का सार है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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श्लोक 55/78 71% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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