मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया॥६१॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
9 पदईश्वरः
the Lord
सर्व-भूतानाम्
of all beings
हृत्-देशे
in the heart
अर्जुन
O Arjuna
तिष्ठति
dwells
भ्रामयन
causing to revolve
सर्व-भूतानि
all beings
यन्त्र-आरूढानि
mounted on a machine
मायया
by His Maya.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे अर्जुन! सम्पूर्ण प्राणियों के हृदय में ईश्वर स्थित है, जो माया द्वारा सब प्राणियों को यन्त्र पर बैठे हुए की भाँति घुमा रहा है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान् सर्वव्यापी हैं और सबके हृदय में विराजमान हैं। वे अपनी मायाशक्ति से सब जीवों को उनके कर्मानुसार यन्त्रवत् घुमाते हैं। यह जीव की परतन्त्रता को दर्शाता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे अर्जुन! सम्पूर्ण प्राणियों के हृदय में ईश्वर स्थित है, जो माया द्वारा सब प्राणियों को यन्त्र पर बैठे हुए की भाँति घुमा रहा है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
ईश्वर सबके अन्तर्यामी हैं। वे ही सबका संचालन करते हैं। इस ज्ञान से व्यक्ति को विनम्रता और समर्पण का भाव आता है।