मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत। तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम्॥६२॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदतम्
Him
एव
alone
शरणम्
refuge
गच्छ
go
सर्व-भावेन
with all your being
भारत
O Bharata
तत्-प्रसादात्
by His grace
पराम्
supreme
शान्तिम्
peace
स्थानम्
abode
प्राप्स्यसि
you will attain
शाश्वतम्
eternal.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे भारत! तू सब प्रकार से उस एक परमेश्वर की ही शरण में जा। उसकी कृपा से तू परम शान्ति और शाश्वत स्थान को प्राप्त होगा।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान् अर्जुन को आदेश देते हैं कि वह उन्हीं की शरण में जाए (अर्थात् कृष्ण की या परमात्मा की)। उनकी कृपा से ही वह परम शान्ति और मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे भारत! तू सब प्रकार से उस परमेश्वर की ही शरण में जा। उसकी कृपा से तू परम शान्ति और शाश्वत स्थान को प्राप्त होगा।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
शरणागति ही परम साधना है। ईश्वर की कृपा से ही साधक को परम शान्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।