मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया। विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु॥६३॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
14 पदइति
thus
ते
to you
ज्ञानम्
knowledge
आख्यातम्
has been taught
गुह्यात्
than secret
गुह्यतरम्
more secret
मया
by Me
विमृश्य
reflecting
एतत्
on this
अशेषेण
fully
यथा
as
इच्छसि
you wish
तथा
so
कुरु
do.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
इस प्रकार मैंने तुझसे इस ज्ञान को कहा जो रहस्यों में भी अति रहस्य है। इसका सम्पूर्ण विचार करके, जैसा तू चाहे वैसा कर।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान् अब अपना उपदेश समाप्त करते हैं। उन्होंने अर्जुन को गुह्यतम ज्ञान दिया है। अब वे उसे पूर्ण विचार करने के बाद जैसा वह चाहे, वैसा करने की स्वतन्त्रता देते हैं। यह मानव की स्वतन्त्र इच्छा को दर्शाता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
इस प्रकार मैंने तुझसे इस ज्ञान को कहा जो रहस्यों में भी अति रहस्य है। इसका सम्पूर्ण विचार करके, जैसा तू चाहे वैसा कर।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गीता ज्ञान देती है, पर मनुष्य को अपनी बुद्धि से विचार कर मार्ग चुनने की स्वतन्त्रता है। यह उसकी जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।