मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सर्वगुह्यतमं भूयः शृणु मे परमं वचः। इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्॥६४॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदसर्व-गुह्यतमम्
the most confidential of all
भूयः
again
शृणु
hear
मे
My
परमम्
supreme
वचः
word
इष्टः
dear
असि
you are
मे
to Me
दृढम्
very
इति
thus
ततः
therefore
वक्ष्यामि
I shall speak
ते
for your
हितम्
benefit.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
सबसे अति गोपनीय मेरे इस परम वचन को फिर से सुन। तू मुझे अत्यन्त प्रिय है, इसलिए मैं तेरे हित के लिए कहूँगा।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान् अब सबसे गोपनीय उपदेश देने जा रहे हैं, क्योंकि अर्जुन उनके अत्यन्त प्रिय हैं। यह भक्ति का शिखर है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
सबसे अति गोपनीय मेरे इस परम वचन को फिर से सुन। तू मुझे अत्यन्त प्रिय है, इसलिए मैं तेरे हित के लिए कहूँगा।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान् अपने भक्त पर अत्यन्त कृपालु हैं और उसे सर्वोच्च ज्ञान देते हैं। यह भक्ति की महिमा है।