श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 65

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 3 मिनट का पठन 104 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु। मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥६५॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
मत्-मनाः
with mind fixed on Me
भव
become
मत्-भक्तः
My devotee
मत्-याजी
My worshipper
माम्
to Me
नमः कुरु
bow down
माम्
to Me
एव
alone
एष्यसि
you will come
सत्यम्
truly
ते
to you
प्रतिजाने
I promise
प्रियः
dear
असि
you are
मे
to Me.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

मुझमें मन लगा, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन कर, मुझको नमस्कार कर। इस प्रकार तू मुझको ही प्राप्त होगा। मैं तुझसे सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ, क्योंकि तू मुझे प्रिय है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह गीता का सबसे महत्वपूर्ण श्लोक है, जो भक्तियोग का सार है। भगवान् स्पष्ट रूप से वचन देते हैं कि जो उनमें मन लगाता है, उनका भक्त बनता है, उनकी पूजा करता है और उन्हें नमस्कार करता है, वह उन्हें ही प्राप्त होता है। यह प्रतिज्ञा अटल है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

मुझमें मन लगा, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन कर, मुझको नमस्कार कर। इस प्रकार तू मुझको ही प्राप्त होगा। मैं तुझसे सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ, क्योंकि तू मुझे प्रिय है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह भक्ति का सर्वोच्च मार्ग है। भगवान् स्वयं वचन देते हैं कि उनकी शरण में आने वाला कभी नष्ट नहीं होता, अन्ततः उन्हें ही प्राप्त होता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 65 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 65/78 83% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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