मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥६६॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदसर्व-धर्मान्
all duties
परित्यज्य
abandoning
माम्
Me
एकम्
alone
शरणम्
refuge
व्रज
take
अहम्
I
त्वा
you
सर्व-पापेभ्यः
from all sins
मोक्षयिष्यामि
will liberate
मा
do not
शुचः
grieve.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
सब धर्मों (कर्तव्यों) को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ। मैं तुझे सब पापों से मुक्त कर दूँगा; शोक मत कर।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह गीता का सबसे प्रसिद्ध और सारगर्भित श्लोक है। भगवान् कहते हैं कि समस्त धर्मों का परित्याग करके केवल उनकी शरण में जाने से वे सब पापों से मुक्त कर देंगे। यह पूर्ण शरणागति का सिद्धान्त है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
सब धर्मों (कर्तव्यों) का परित्याग करके केवल मेरी शरण में आ। मैं तुझे सब पापों से मुक्त कर दूँगा; शोक मत कर।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
यह गीता का सर्वोच्च रहस्य है। ईश्वर की पूर्ण शरणागति ही सबसे सरल और सुनिश्चित मोक्ष मार्ग है।