मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
य इदं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति। भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः॥६८॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
14 पदयः
who
इदम्
this
परमम्
most
गुह्यम्
confidential
मत्-भक्तेषु
among My devotees
अभिधास्यति
will teach
भक्तिम्
devotion
मयि
to Me
पराम्
supreme
कृत्वा
having done
माम्
to Me
एव
alone
एष्यति
will come
असंशयः
without doubt.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जो इस परम गोपनीय ज्ञान को मेरे भक्तों में कहेगा, तथा मुझमें परम भक्ति करेगा, वह निःसन्देह मुझको ही प्राप्त होगा।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
जो व्यक्ति इस गीता ज्ञान को भक्तों के बीच प्रचारित करता है, वह स्वयं परम भक्ति करने वाला होता है और निश्चित ही भगवान् को प्राप्त होता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
जो इस परम गोपनीय ज्ञान को मेरे भक्तों में कहेगा, और मुझमें परम भक्ति करेगा, वह निःसन्देह मुझको ही प्राप्त होगा।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गीता का प्रचार करना भी एक उच्चतम भक्ति है। इससे प्रचारक स्वयं भी भगवत्प्राप्ति का अधिकारी बनता है।