मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः। भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि॥६९॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदन
not
च
and
तस्मात्
than him
मनुष्येषु
among men
कश्चित्
anyone
मे
to Me
प्रिय-कृत्-तमः
more dear
भविता
will be
न
not
च
and
मे
to Me
तस्मात्
than him
अन्यः
other
प्रियतरः
dearer
भुवि
on earth.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
उससे बढ़कर मनुष्यों में मेरा प्रिय कार्य करने वाला दूसरा नहीं है और न ही पृथ्वी पर उससे अधिक मुझे प्रिय दूसरा कोई होगा।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
गीता का प्रचार करने वाला भगवान् का सबसे प्रिय भक्त है। भगवान् स्पष्ट करते हैं कि उन्हें ऐसा व्यक्ति अत्यन्त प्रिय है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
उससे बढ़कर मनुष्यों में मेरा प्रिय कार्य करने वाला दूसरा कोई नहीं है और न ही पृथ्वी पर उससे अधिक मुझे प्रिय दूसरा कोई होगा।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गीता के प्रचार-प्रसार का कार्य अत्यन्त महान् है। ऐसा व्यक्ति भगवान् को अत्यन्त प्रिय होता है।