मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अध्येष्यते च य इमं धर्म्यं संवादमावयोः। ज्ञानयज्ञेन तेनाहमिष्टः स्यामिति मे मतिः॥७०॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदअध्येष्यते
will study
च
and
यः
who
इमम्
this
धर्म्यम्
sacred
संवादम्
dialogue
आवयोः
of ours
ज्ञान-यज्ञेन
by the sacrifice of knowledge
तेन
by him
अहम्
I
इष्टः
worshipped
स्याम्
am
इति
thus
मे
My
मतिः
opinion.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
तथा जो हम दोनों के इस धर्मयुक्त संवाद का अध्ययन करेगा, उसके द्वारा मैं ज्ञानयज्ञ से पूजित होऊँगा – ऐसा मेरा मत है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
जो भी इस गीता-संवाद का अध्ययन करता है, वह ज्ञानयज्ञ द्वारा भगवान् की पूजा करता है। यह अध्ययन स्वयं एक यज्ञ है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
और जो हम दोनों के इस धर्मयुक्त संवाद का अध्ययन करेगा, उसके द्वारा मैं ज्ञानयज्ञ से पूजित होऊँगा – ऐसा मेरा मत है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गीता का अध्ययन मात्र भी एक यज्ञ है। यह ज्ञानयज्ञ है, जो भगवान् को अत्यन्त प्रिय है।