श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 73

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 3 मिनट का पठन 99 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अर्जुन उवाच नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत। स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव॥७३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
अर्जुन
Arjuna
उवाच
said
नष्टः
destroyed
मोहः
delusion
स्मृतिः
memory
लब्धा
regained
त्वत्-प्रसादात्
by Your grace
मया
by me
अच्युत
O infallible one
स्थितः
standing
अस्मि
I am
गत-सन्देहः
freed from doubt
करिष्ये
I will act
वचनम्
word
तव
Your.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अर्जुन बोले: हे अच्युत! आपकी कृपा से मेरा मोह नष्ट हो गया और स्मृति (ज्ञान) प्राप्त हो गई। मैं संशयरहित होकर स्थित हूँ; आपके वचन का पालन करूँगा।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

अर्जुन अब भगवान् के उपदेश का फल घोषित करते हैं। उनका मोह दूर हो गया, उन्हें स्मृति (अपने स्वरूप का ज्ञान) मिल गया, वे संशयरहित हो गए हैं और भगवान् की आज्ञा का पालन करेंगे।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

अर्जुन बोले: हे अच्युत! आपकी कृपा से मेरा मोह नष्ट हो गया और मुझे स्मृति (ज्ञान) प्राप्त हो गई। मैं संशयरहित होकर स्थित हूँ; आपके वचन का पालन करूँगा।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

गुरु की कृपा से शिष्य का अज्ञान दूर होता है। फिर वह कर्तव्य-बोध के साथ अपने कर्म में प्रवृत्त होता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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श्लोक 73/78 94% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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