मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अर्जुन उवाच नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत। स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव॥७३॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदअर्जुन
Arjuna
उवाच
said
नष्टः
destroyed
मोहः
delusion
स्मृतिः
memory
लब्धा
regained
त्वत्-प्रसादात्
by Your grace
मया
by me
अच्युत
O infallible one
स्थितः
standing
अस्मि
I am
गत-सन्देहः
freed from doubt
करिष्ये
I will act
वचनम्
word
तव
Your.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
अर्जुन बोले: हे अच्युत! आपकी कृपा से मेरा मोह नष्ट हो गया और स्मृति (ज्ञान) प्राप्त हो गई। मैं संशयरहित होकर स्थित हूँ; आपके वचन का पालन करूँगा।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन अब भगवान् के उपदेश का फल घोषित करते हैं। उनका मोह दूर हो गया, उन्हें स्मृति (अपने स्वरूप का ज्ञान) मिल गया, वे संशयरहित हो गए हैं और भगवान् की आज्ञा का पालन करेंगे।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
अर्जुन बोले: हे अच्युत! आपकी कृपा से मेरा मोह नष्ट हो गया और मुझे स्मृति (ज्ञान) प्राप्त हो गई। मैं संशयरहित होकर स्थित हूँ; आपके वचन का पालन करूँगा।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गुरु की कृपा से शिष्य का अज्ञान दूर होता है। फिर वह कर्तव्य-बोध के साथ अपने कर्म में प्रवृत्त होता है।