मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सञ्जय उवाच इत्यहं वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः। संवादमिममश्रौषमद्भुतं रोमहर्षणम्॥७४॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदसञ्जय
Sanjaya
उवाच
said
इति
thus
अहम्
I
वासुदेवस्य
of Vasudeva (Krishna)
पार्थस्य
of Partha (Arjuna)
च
and
महा-आत्मनः
of the great soul
संवादम्
dialogue
इमम्
this
अश्रौषम्
heard
अद्भुतम्
wonderful
रोमहर्षणम्
thrilling.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
सञ्जय बोले: इस प्रकार मैंने वासुदेव और महात्मा अर्जुन के इस अद्भुत और रोमांचक संवाद को सुना।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अब सञ्जय धृतराष्ट्र से कहते हैं कि उन्होंने यह अद्भुत संवाद सुना, जो अत्यन्त रोमांचकारी है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
सञ्जय बोले: इस प्रकार मैंने वासुदेव और महात्मा अर्जुन के इस अद्भुत और रोमांचकारी संवाद को सुना।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गीता का यह संवाद अद्भुत है, जिसे सुनकर रोमांच होता है। यह मानव इतिहास का सर्वोच्च आध्यात्मिक संवाद है।