मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
व्यासप्रसादाच्छ्रुतवानेतद्गुह्यमहं परम्। योगं योगेश्वरात्कृष्णात्साक्षात्कथयतः स्वयम्॥७५॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदव्यास-प्रसादात्
by the grace of Vyasa
श्रुतवान्
have heard
एतत्
this
गुह्यम्
secret
अहम्
I
परम्
supreme
योगम्
yoga
योग-ईश्वरात्
from the Lord of Yoga
कृष्णात्
from Krishna
साक्षात्
directly
कथयतः
speaking
स्वयम्
Himself.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
व्यास की कृपा से मैंने इस परम गोपनीय योग को साक्षात् योगेश्वर श्रीकृष्ण से, जो स्वयं कह रहे थे, सुना।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
सञ्जय बताते हैं कि उन्हें व्यासजी की कृपा से यह अलौकिक शक्ति मिली कि वे दूर बैठे ही कृष्ण-अर्जुन के संवाद को सुन सके। यह गुरु-कृपा का महत्व है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
व्यास की कृपा से मैंने इस परम गोपनीय योग को साक्षात् योगेश्वर श्रीकृष्ण से, जो स्वयं कह रहे थे, सुना।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गुरु की कृपा से ही दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है। सञ्जय को व्यास की कृपा से यह शक्ति मिली।