श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 76

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 2 मिनट का पठन 111 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम्। केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः॥७६॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
राजन्
O King
संस्मृत्य संस्मृत्य
remembering again and again
संवादम्
dialogue
इमम्
this
अद्भुतम्
wonderful
केशव-अर्जुनयोः
of Keshava and Arjuna
पुण्यम्
holy
हृष्यामि
I rejoice
च
and
मुहुः मुहुः
repeatedly.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे राजन्! केशव और अर्जुन के इस अद्भुत एवं पुण्यमय संवाद को बार-बार स्मरण करके मैं बारम्बार हर्षित होता हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

सञ्जय धृतराष्ट्र से कहते हैं कि जब-जब वे इस संवाद को याद करते हैं, उन्हें अपार हर्ष होता है। यह गीता के नित्य स्मरण का महत्व बताता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

हे राजन्! केशव और अर्जुन के इस अद्भुत और पुण्यमय संवाद को बार-बार स्मरण करके मैं बारम्बार हर्षित होता हूँ।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

गीता का स्मरण आनन्ददायी है। इसके मनन से हृदय में उल्लास और पवित्रता आती है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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श्लोक 76/78 97% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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