मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम्। केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः॥७६॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदराजन्
O King
संस्मृत्य संस्मृत्य
remembering again and again
संवादम्
dialogue
इमम्
this
अद्भुतम्
wonderful
केशव-अर्जुनयोः
of Keshava and Arjuna
पुण्यम्
holy
हृष्यामि
I rejoice
च
and
मुहुः मुहुः
repeatedly.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे राजन्! केशव और अर्जुन के इस अद्भुत एवं पुण्यमय संवाद को बार-बार स्मरण करके मैं बारम्बार हर्षित होता हूँ।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
सञ्जय धृतराष्ट्र से कहते हैं कि जब-जब वे इस संवाद को याद करते हैं, उन्हें अपार हर्ष होता है। यह गीता के नित्य स्मरण का महत्व बताता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे राजन्! केशव और अर्जुन के इस अद्भुत और पुण्यमय संवाद को बार-बार स्मरण करके मैं बारम्बार हर्षित होता हूँ।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गीता का स्मरण आनन्ददायी है। इसके मनन से हृदय में उल्लास और पवित्रता आती है।