श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 8

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 2 मिनट का पठन 114 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत्। स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत्॥८॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
दुःखम्
painful
इति
thus
एव
indeed
यत्
which
कर्म
action
काय-क्लेश-भयात्
from fear of bodily trouble
त्यजेत्
one may renounce
सः
that person
कृत्वा
having done
राजसम्
in the mode of passion
त्यागम्
renunciation
न
not
एव
indeed
त्याग-फलम्
fruit of renunciation
लभेत्
obtains.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जो कर्म दुःखरूप है, ऐसा मानकर शारीरिक क्लेश के भय से त्याग देता है, वह राजस त्याग करता है और उसे त्याग का फल नहीं मिलता।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

कुछ लोग कर्म को कठिन या शरीर को कष्ट देने वाला समझकर त्याग देते हैं। यह राजस त्याग है, जो सात्त्विक त्याग के फल से वंचित रहता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जो व्यक्ति कर्म को दुःखदायक समझकर शारीरिक कष्ट के डर से त्याग देता है, वह राजस त्याग करता है और त्याग का फल नहीं पाता।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

त्याग का अर्थ कठिनाई से भागना नहीं है। सच्चा त्याग तो आसक्ति और फलेच्छा का त्याग है, न कि कर्म का।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 8 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 8/78 10% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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