श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 18 (मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga))

अध्याय 18 · श्लोक 9

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 78 2 मिनट का पठन 109 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेऽर्जुन। सङ्गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः॥९॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

17 पद
कार्यम्
ought to be done
इति
thus
एव
indeed
यत्
which
कर्म
action
नियतम्
prescribed
क्रियते
is performed
अर्जुन
O Arjuna
सङ्गम्
attachment
त्यक्त्वा
having abandoned
फलम्
fruit
च
and
एव
also
सः
that
त्यागः
renunciation
सात्त्विकः
in the mode of goodness
मतः
is considered.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे अर्जुन! जो नियत कर्म केवल कर्तव्य समझकर, आसक्ति और फल का त्याग करके किया जाता है, वह त्याग सात्त्विक माना गया है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यहाँ सात्त्विक त्याग का लक्षण बताया गया है। कर्तव्य भावना से, बिना आसक्ति और फल की इच्छा के कर्म करना ही सात्त्विक त्याग है। यही गीता का आदर्श है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

हे अर्जुन! जो नियत कर्म केवल कर्तव्य समझकर, आसक्ति और फल का त्याग करके किया जाता है, वह त्याग सात्त्विक कहलाता है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

सच्चा त्याग कर्मों का परित्याग नहीं, बल्कि आसक्ति और फलेच्छा का त्याग है। कर्तव्यपालन ही सात्त्विक त्याग है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga)
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श्लोक 9/78 12% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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