मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते | सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ||६२||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदध्यायतः
चिन्तन करते हुए
विषयान्
विषयों का
पुंसः
पुरुष के
सङ्गः
आसक्ति
तेषु
उनमें
उपजायते
उत्पन्न होती है
सङ्गात्
आसक्ति से
सञ्जायते
उत्पन्न होता है
कामः
कामना
कामात्
कामना से
क्रोधः
क्रोध
अभिजायते
उत्पन्न होता है।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
विषयों का चिन्तन करते हुए पुरुष की उनमें आसक्ति उत्पन्न होती है। आसक्ति से कामना उत्पन्न होती है, कामना से क्रोध उत्पन्न होता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह श्लोक पतन की प्रक्रिया बताता है – विषय-चिन्तन से आसक्ति, आसक्ति से कामना, कामना से क्रोध।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
विषयों का चिन्तन करने से उनमें आसक्ति उत्पन्न होती है। आसक्ति से कामना, कामना से क्रोध उत्पन्न होता है। When a person dwells on sense objects, attachment arises. From attachment, desire is born. From desire, anger arises.
मनोविज्ञान / Psychology
यह श्लोक मानव मन की गहरी प्रक्रिया का वर्णन करता है।