श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 2 (सांख्य योग (Sankhya Yoga))

अध्याय 2 · श्लोक 63

सांख्य योग (Sankhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 72 3 मिनट का पठन 106 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः | स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ||६३||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

9 पद
क्रोधात्
क्रोध से
भवति
होता है
सम्मोहः
मोह
सम्मोहात्
मोह से
स्मृतिविभ्रमः
स्मृति का भ्रम
स्मृतिभ्रंशात्
स्मृति के भ्रंश (नाश) से
बुद्धिनाशः
बुद्धि का नाश
बुद्धिनाशात्
बुद्धि नाश से
प्रणश्यति
नष्ट हो जाता है (पतित हो जाता है)।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

क्रोध से मोह उत्पन्न होता है, मोह से स्मृति-भ्रम होता है, स्मृति-भ्रम से बुद्धि का नाश होता है, और बुद्धि-नाश से मनुष्य नष्ट (पतित) हो जाता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

क्रोध से मोह, मोह से स्मृतिभ्रम, स्मृतिभ्रम से बुद्धिनाश, और बुद्धिनाश से सर्वनाश। यह क्रम बताता है कि कैसे एक व्यक्ति पतन के गर्त में गिरता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

क्रोध से मोह उत्पन्न होता है, मोह से स्मृति-भ्रम, स्मृति-भ्रम से बुद्धि-नाश, और बुद्धि-नाश से मनुष्य नष्ट हो जाता है। From anger comes delusion; from delusion, loss of memory; from loss of memory, destruction of discrimination; from destruction of discrimination, he perishes.

चेतावनी / Warning

इसलिए क्रोध और कामनाओं पर नियंत्रण रखना अत्यन्त आवश्यक है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 2: सांख्य योग (Sankhya Yoga)
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श्लोक 63/72 88% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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