मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते | प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते ||६५||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदप्रसादे
प्रसाद (शान्ति) प्राप्त होने पर
सर्वदुःखानाम्
सब दुःखों की
हानिः
हानि
अस्य
इसकी
उपजायते
हो जाती है
प्रसन्नचेतसः
प्रसन्न चित्त वाले की
हि
निश्चय ही
आशु
शीघ्र
बुद्धिः
बुद्धि
पर्यवतिष्ठते
सम्यक् प्रकार से स्थित हो जाती है।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
उस प्रसाद (शान्ति) के प्राप्त होने पर इसके (साधक के) सब दुःखों का नाश हो जाता है, क्योंकि प्रसन्न चित्त वाले की बुद्धि शीघ्र ही स्थिर हो जाती है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
शान्ति प्राप्त होने पर सभी दुःख नष्ट हो जाते हैं, और प्रसन्न चित्त वाले की बुद्धि स्थिर हो जाती है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
उस शान्ति के प्राप्त होने पर उसके सब दुःखों का नाश हो जाता है, क्योंकि प्रसन्न चित्त वाले की बुद्धि शीघ्र ही स्थिर हो जाती है। In that peace, all sorrows are destroyed. For the intellect of one who is peaceful and content soon becomes steady.
शान्ति का फल / Fruit of Peace
शान्ति से बुद्धि स्थिर होती है और सभी दुःख मिट जाते हैं।