मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः | इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ||६८||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदतस्मात्
इसलिए
यस्य
जिसके
महाबाहो
हे महाबाहो
निगृहीतानि
रोके गए
सर्वशः
सब प्रकार से
इन्द्रियाणि
इन्द्रियाँ
इन्द्रियार्थेभ्यः
इन्द्रियों के विषयों से
तस्य
उसकी
प्रज्ञा
प्रज्ञा
प्रतिष्ठिता
स्थिर है।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
इसलिए हे महाबाहो! जिस पुरुष की इन्द्रियाँ इन्द्रिय-विषयों से सब प्रकार से रोक ली गई हैं, उसकी प्रज्ञा स्थिर है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
निष्कर्ष – जिसकी इन्द्रियाँ पूरी तरह विषयों से हटा ली गई हैं, उसकी बुद्धि स्थिर होती है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
इसलिए हे महाबाहो! जिस पुरुष की इन्द्रियाँ इन्द्रिय-विषयों से सब प्रकार से रोक ली गई हैं, उसकी प्रज्ञा स्थिर है। Therefore, O mighty-armed, one whose senses are completely restrained from their objects – his wisdom is steady.
निग्रह का महत्व / Importance of Control
इन्द्रिय-निग्रह ही स्थितप्रज्ञता का रहस्य है।