श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 2 (सांख्य योग (Sankhya Yoga))

अध्याय 2 · श्लोक 69

सांख्य योग (Sankhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 72 3 मिनट का पठन 121 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी | यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः ||६९||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
या
जो
निशा
रात्रि
सर्वभूतानाम्
समस्त प्राणियों की
तस्याम्
उसमें
जागर्ति
जागता है
संयमी
संयमी
यस्याम्
जिसमें
जाग्रति
जागते हैं
भूतानि
प्राणी
सा
वह
निशा
रात्रि
पश्यतः
देखने वाले
मुनेः
मुनि की।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

समस्त प्राणियों के लिए जो रात्रि (अज्ञान) है, उसमें संयमी पुरुष जागता है। जिस (विषय-भोग) में सब प्राणी जागते हैं, वह आत्मदर्शी मुनि के लिए रात्रि (अज्ञान) है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

संयमी के लिए संसार का भोग रात्रि (अज्ञान) के समान है, जबकि सांसारिक लोग उसमें जागते हैं। परमार्थ की जागृति संयमी में होती है, जबकि सांसारिक उसमें सोते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

समस्त प्राणियों के लिए जो रात्रि (अज्ञान) है, उसमें संयमी पुरुष जागता है। जिस (विषय-भोग) में सब प्राणी जागते हैं, वह आत्मदर्शी मुनि के लिए रात्रि है। That which is night to all beings, in that the self-controlled man keeps awake. That in which all beings are awake, that is night to the sage who sees.

विपरीत ध्रुवता / Opposite Polarity

ज्ञानी और अज्ञानी के जीवन-मूल्य एक-दूसरे के विपरीत होते हैं।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 2: सांख्य योग (Sankhya Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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