श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 2 (सांख्य योग (Sankhya Yoga))

अध्याय 2 · श्लोक 70

सांख्य योग (Sankhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 72 3 मिनट का पठन 111 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् | तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोति न कामकामी ||७०||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

16 पद
आपूर्यमाणम्
भरते हुए भी
अचलप्रतिष्ठम्
अचल प्रतिष्ठा वाले
समुद्रम्
समुद्र में
आपः
जल
प्रविशन्ति
प्रवेश करते हैं
यद्वत्
जैसे
तद्वत्
वैसे ही
कामाः
कामनाएँ
यम्
जिसमें
प्रविशन्ति
प्रवेश करती हैं
सर्वे
सब
सः
वह
शान्तिम्
शान्ति
आप्नोति
प्राप्त होता है
न
नहीं
कामकामी
कामनाओं को चाहने वाला।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जैसे नदियाँ भरते हुए भी अचल समुद्र में प्रवेश करती हैं, वैसे ही जिस (स्थितप्रज्ञ) में सब कामनाएँ प्रवेश करती हैं, वह शान्ति को प्राप्त होता है, न कि कामनाओं का चाहने वाला (कामी)।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

समुद्र का दृष्टान्त – नदियाँ आकर समुद्र में मिलती हैं, पर समुद्र अचल रहता है। वैसे ही स्थितप्रज्ञ में कामनाएँ आती हैं, पर वह अविचलित रहता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जैसे नदियाँ भरते हुए भी अचल समुद्र में प्रवेश करती हैं, वैसे ही जिसमें सब कामनाएँ प्रवेश करती हैं, वह शान्ति पाता है, न कि कामनाओं को चाहने वाला। He attains peace into whom all desires flow like rivers into the ocean, which remains unmoved – not he who desires objects.

अचलता / Steadiness

स्थितप्रज्ञ कामनाओं के आने पर भी अविचलित रहता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 2: सांख्य योग (Sankhya Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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