मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः | निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति ||७१||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदविहाय
त्यागकर
कामान्
कामनाओं को
यः
जो
सर्वान्
सब
पुमान्
पुरुष
चरति
आचरण करता है
निःस्पृहः
निःस्पृह (इच्छारहित)
निर्ममः
ममतारहित
निरहङ्कारः
अहंकाररहित
सः
वह
शान्तिम्
शान्ति
अधिगच्छति
प्राप्त होता है।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जो पुरुष सब कामनाओं को त्यागकर निःस्पृह (इच्छारहित), निर्मम (ममतारहित) और निरहङ्कार (अहंकाररहित) होकर आचरण करता है, वह शान्ति को प्राप्त होता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
शान्ति का मार्ग – सभी कामनाओं का त्याग, ममता और अहंकार से मुक्त होकर जीना।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
जो पुरुष सब कामनाओं को त्यागकर निःस्पृह, निर्मम और निरहङ्कार होकर आचरण करता है, वह शान्ति को प्राप्त होता है। That person who abandons all desires and acts free from craving, without mineness or egoism, attains peace.
शान्ति की शर्त / Condition for Peace
शान्ति के लिए कामना, ममता और अहंकार का त्याग आवश्यक है।