श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 3 (कर्म योग (Karma Yoga))

अध्याय 3 · श्लोक 10

कर्म योग (Karma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 43 3 मिनट का पठन 122 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापतिः | अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक् ||१०||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
सहयज्ञाः
यज्ञ के साथ
प्रजाः
प्रजाओं को
सृष्ट्वा
सृष्टि करके
पुरा
पूर्व काल में
उवाच
बोला
प्रजापतिः
प्रजापति (ब्रह्मा)
अनेन
इस (यज्ञ) से
प्रसविष्यध्वम्
बढ़ो-फूलो
एष
यह
व
तुम्हारे लिए
अस्तु
हो
इष्टकामधुक्
इच्छित कामनाओं को पूर्ण करने वाला।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

प्रजापति (ब्रह्मा) ने युगों के आदि में यज्ञ के साथ प्रजाओं को उत्पन्न करके कहा – इस (यज्ञ) से तुम लोग समृद्ध होओ और यह (यज्ञ) तुम्हारी समस्त इच्छित कामनाओं को पूर्ण करने वाला हो।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान अब वैदिक सृष्टि-कथा का उल्लेख करते हैं कि ब्रह्मा ने मनुष्यों को यज्ञ के साथ बनाया और उन्हें यज्ञ द्वारा समृद्ध होने का आदेश दिया। यज्ञ ही कामधेनु है जो इच्छाएँ पूरी करता है। The Lord now refers to the Vedic creation story: Brahmā created humans along with yajña and instructed them to prosper through it. Yajña itself is the wish-fulfilling cow.

श्लोक का अर्थ / Meaning

ब्रह्मा ने यज्ञ के साथ मनुष्यों को बनाया और कहा कि यज्ञ से समृद्ध होओ। Brahmā created humans with sacrifice and told them to prosper through it.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 3: कर्म योग (Karma Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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