श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 3 (कर्म योग (Karma Yoga))

अध्याय 3 · श्लोक 14

कर्म योग (Karma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 43 3 मिनट का पठन 128 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः | यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः ||१४||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
अन्नात्
अन्न से
भवन्ति
उत्पन्न होते हैं
भूतानि
प्राणी
पर्जन्यात्
वर्षा से
अन्नसम्भव
अन्न की उत्पत्ति
यज्ञात्
यज्ञ से
भवति
होती है
पर्जन्य
वर्षा
यज्ञ
यज्ञ
कर्मसमुद्भव
कर्म से उत्पन्न।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अन्न से प्राणी उत्पन्न होते हैं; वर्षा से अन्न की उत्पत्ति होती है; यज्ञ से वर्षा होती है; और यज्ञ कर्म से उत्पन्न होता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान यहाँ एक पारिस्थितिक और आध्यात्मिक चक्र बताते हैं – अंततः सब कर्म पर निर्भर है। यज्ञ (सकाम कर्म) से वर्षा, वर्षा से अन्न, अन्न से प्राणी। इसलिए कर्म अपरिहार्य है। The Lord here describes an ecological and spiritual cycle – ultimately everything depends on action. Sacrifice brings rain, rain brings food, food sustains beings. Thus action is inevitable.

श्लोक का अर्थ / Meaning

अन्न से प्राणी, वर्षा से अन्न, यज्ञ से वर्षा, और यज्ञ कर्म से। This shows the interdependence of all life on action.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 3: कर्म योग (Karma Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 14 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 14/43 33% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!