मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
कर्म ब्रह्मोद्भवं विद्धि ब्रह्माक्षरसमुद्भवम् | तस्मात्सर्वगतं ब्रह्म नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठितम् ||१५||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
11 पदकर्म
कर्म
ब्रह्मोद्भवम्
वेद से उत्पन्न
विद्धि
जानो
ब्रह्म
वेद
अक्षरसमुद्भवम्
अक्षर (परब्रह्म) से उत्पन्न
तस्मात्
इसलिए
सर्वगतम्
सर्वव्यापी
ब्रह्म
परब्रह्म
नित्यम्
सदा
यज्ञे
यज्ञ में
प्रतिष्ठितम्
स्थित है।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
कर्म (यज्ञ) को वेद से उत्पन्न जानो और वेद को अक्षर (परब्रह्म) से उत्पन्न। इसलिए सर्वव्यापी ब्रह्म सदा यज्ञ में प्रतिष्ठित है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यहाँ भगवान वैदिक कर्मकाण्ड के आध्यात्मिक स्रोत की ओर इशारा करते हैं – यज्ञ वेदों पर आधारित हैं, और वेद स्वयं ब्रह्म से प्रकट हुए हैं। अतः यज्ञ में ब्रह्म की उपस्थिति है। Here the Lord points to the spiritual source of Vedic rituals – yajñas are based on the Vedas, and the Vedas themselves emanate from Brahman. Thus Brahman is present in yajña.
श्लोक का अर्थ / Meaning
यज्ञ वेद से, वेद ब्रह्म से – इसलिए ब्रह्म यज्ञ में स्थित है। Sacrifice comes from the Vedas, the Vedas from Brahman – thus Brahman is present in sacrifice.