श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 3 (कर्म योग (Karma Yoga))

अध्याय 3 · श्लोक 16

कर्म योग (Karma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 43 3 मिनट का पठन 124 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः | अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति ||१६||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
एवम्
इस प्रकार
प्रवर्तितम्
प्रवर्तित (चलाया गया)
चक्रम्
चक्र
न
नहीं
अनुवर्तयति
अनुसरण करता
इह
इस संसार में
य
जो
अघायु
पापमय जीवन वाला
इन्द्रियाराम
इन्द्रियों में रमण करने वाला
मोघम्
व्यर्थ
पार्थ
हे पार्थ
स
वह
जीवति
जीता है।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे पार्थ! जो इस प्रकार प्रवर्तित (चलाए गए) यज्ञ चक्र का अनुसरण नहीं करता, वह पापमय जीवन वाला, इन्द्रियों में रमण करने वाला व्यर्थ जीता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान अब कहते हैं कि जो इस वैश्विक चक्र (यज्ञ-वर्षा-अन्न-प्राणी) में सहयोग नहीं करता, वह केवल अपने इन्द्रिय सुख में लगा रहता है – उसका जीवन व्यर्थ है। यह सामाजिक और आध्यात्मिक उत्तरदायित्व का बोध कराता है। The Lord now says that one who does not participate in this cosmic cycle of sacrifice lives only for sense pleasure – such a life is futile. This highlights social and spiritual responsibility.

श्लोक का अर्थ / Meaning

जो इस यज्ञ चक्र का अनुसरण नहीं करता, वह केवल इन्द्रिय सुख में लिप्त रहता है और उसका जीवन व्यर्थ है। One who does not follow this cycle lives for sense pleasure and lives in vain.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 3: कर्म योग (Karma Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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