मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन | न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः ||१८||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदन
नहीं
एव
ही
तस्य
उसके
कृतेन
किए गए कर्म से
अर्थ
प्रयोजन
न
नहीं
अकृतेन
न किए गए कर्म से
इह
इस लोक में
कश्चन
कुछ भी
न
नहीं
च
और
अस्य
इसके
सर्वभूतेषु
सब प्राणियों में
कश्चित्
कोई
अर्थव्यपाश्रय
प्रयोजन के लिए आश्रय।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
उस (आत्मसंतुष्ट पुरुष) के लिए न तो कर्म करने से कोई प्रयोजन है और न कर्म न करने से। उसका सब भूतों में किसी प्रयोजन के लिए आश्रय नहीं है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
ऐसे ज्ञानी की स्वतंत्रता का वर्णन – उसे किसी कर्म से कुछ मिलना नहीं है, और न करने से कुछ छूटता नहीं। वह किसी पर आश्रित नहीं। The description of the liberated one – he has nothing to gain from action and nothing to lose from inaction. He depends on nothing.
श्लोक का अर्थ / Meaning
आत्मसंतुष्ट पुरुष के लिए कर्म करने या न करने से कुछ लाभ-हानि नहीं, वह किसी पर आश्रित नहीं। The self-satisfied has no benefit from action or inaction; he depends on nothing.