श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 3 (कर्म योग (Karma Yoga))

अध्याय 3 · श्लोक 21

कर्म योग (Karma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 43 3 मिनट का पठन 130 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः | स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ||२१||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
यत् यत्
जो जो
आचरति
आचरण करता है
श्रेष्ठ
श्रेष्ठ पुरुष
तत् तत्
वह वह
एव
ही
इतर
दूसरा
जन
जन
स
वह
यत्
जो
प्रमाणम्
प्रमाण (मानक)
कुरुते
करता है
लोक
लोग
तत्
उसका
अनुवर्तते
अनुसरण करते हैं।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

श्रेष्ठ पुरुष जो-जो आचरण करता है, अन्य लोग भी वैसा ही करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण (मानक) स्थापित करता है, समस्त लोग उसी का अनुसरण करते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान श्रेष्ठ पुरुषों की जिम्मेदारी बताते हैं – उनके आचरण से समाज प्रभावित होता है। इसलिए अर्जुन को युद्ध जैसे कर्तव्य का पालन करना चाहिए ताकि लोग भी अपने कर्तव्य से विमुख न हों। The Lord highlights the responsibility of great souls – their actions influence society. Therefore Arjuna must perform his duty so that others do not abandon theirs.

श्लोक का अर्थ / Meaning

श्रेष्ठ पुरुष का आचरण ही समाज के लिए मानक बन जाता है, इसलिए उसे सदाचरण करना चाहिए। The conduct of the great becomes the standard for society; therefore they must act righteously.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 3: कर्म योग (Karma Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 21 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 21/43 49% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!