मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः | मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ||२३||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
14 पदयदि
यदि
हि
निश्चय ही
अहम्
मैं
न
नहीं
वर्तेयम्
प्रवृत्त रहूँ
जातु
कभी
कर्मणि
कर्म में
अतन्द्रित
सावधान
मम
मेरा
वर्त्म
मार्ग
अनुवर्तन्ते
अनुसरण करते हैं
मनुष्याः
मनुष्य
पार्थ
हे पार्थ
सर्वशः
सभी प्रकार से।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
यदि मैं कभी भी सावधानीपूर्वक कर्म में न लगूँ, तो हे पार्थ! सब मनुष्य मेरे ही मार्ग का अनुसरण करेंगे।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान कहते हैं कि यदि वे स्वयं कर्म न करें, तो लोग भी कर्म छोड़ देंगे – जिससे सामाजिक व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। The Lord says that if He Himself stops working, people will follow suit, leading to social chaos.
श्लोक का अर्थ / Meaning
यदि भगवान भी कर्म न करें तो सभी मनुष्य उनका अनुसरण करेंगे और अकर्म में लग जाएँगे। If the Lord Himself does not act, all men would follow and become inactive.