श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 3 (कर्म योग (Karma Yoga))

अध्याय 3 · श्लोक 29

कर्म योग (Karma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 43 3 मिनट का पठन 110 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
प्रकृतेर्गुणसम्मूढाः सज्जन्ते गुणकर्मसु | तानकृत्स्नविदो मन्दान्कृत्स्नविन्न विचालयेत् ||२९||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
प्रकृते
प्रकृति के
गुणसम्मूढा
गुणों से मोहित
सज्जन्ते
आसक्त होते हैं
गुणकर्मसु
गुणों और कर्मों में
तान्
उनको
अकृत्स्नविद
अल्पज्ञ
मन्दान
मन्दबुद्धि
कृत्स्नवित
सम्पूर्ण ज्ञानी
न
नहीं
विचालयेत्
विचलित करे (भ्रमित करे)।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

प्रकृति के गुणों से मोहित हुए लोग गुणों और कर्मों में आसक्त हो जाते हैं। उन अल्पज्ञ, मन्दबुद्धि लोगों को सम्पूर्ण ज्ञानी को विचलित नहीं करना चाहिए।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान फिर से समझाते हैं कि ज्ञानी को अज्ञानियों को उनके कर्म से विमुख नहीं करना चाहिए। उनका कर्तव्य है कि वे स्वयं आदर्श बनें और धीरे-धीरे लोगों का मार्गदर्शन करें। The Lord again emphasises that the wise should not disturb the ignorant from their duties. Their role is to set an example and gradually guide them.

श्लोक का अर्थ / Meaning

गुणों से मोहित अज्ञानी कर्मों में आसक्त रहते हैं, ज्ञानी को उन्हें विचलित नहीं करना चाहिए। The ignorant, deluded by the guṇas, are attached to actions; the wise should not disturb them.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 3: कर्म योग (Karma Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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